कमजोर लिंगोत्थान: कारण क्या हैं, क्या करना है और इस अवस्था के इलाज के उपाय

About Dr. Nagender Kumar

Urologist, Sex counselor

लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया एक गंभीर मुद्दा है, हालांकि कई पुरुष इसे आपात संकट को भांप कर जागरूक हो जाने के लिए एक संकेत के रूप में नहीं लेते हैं। यौन संबंध रखने में असमर्थता को अक्सर बुढ़ापे, थकान या तनाव से जोड़ा जाता है; हालांकि ज्यादातर मामलों में लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया का कारण पूरी तरह से जैविक होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कारण क्या हैं, पर यह अवस्था असामान्य जरूर है। एक स्वस्थ पुरुष अपने पूरे जीवन के दौरान यौन गतिविधियों को चालू रखने में सक्षम होता है। हर किसी को (अपने) इस समस्या का अध्ययन करने की सिफारिश की जाती है ताकि अक्षमता के कारणों की पहचान हो सके और इसके लक्षणों को यथाशीघ्र पहचान लिया जा सके।

इस समस्या का कारण क्या है?

लिंगोत्थान संबंधी समस्याओं के काफी अलग-अलग लक्षण होते हैं। इस समस्या का संबंध संभोग के दौरान लिंगोत्थान को प्राप्त करने और उसे बनाए रखने में असमर्थता से है। लिंगोत्थान असंभव हो सकते हैं अति कमजोर हो सकते हैं या फिर संभोग के दौरान कमजोर पड़ सकते हैं। लिंगोत्थान की खराब गुणवत्ता अस्थायी या स्थायी हो सकती है। चिकित्सा शास्त्र में इस घटना को कमजोर उत्थान क्षमता के रूप में जाना जाता है। यदि आदमी कमजोर लिंगोत्थान या 25% मामलों में लिंगोत्थान के अभाव के कारण सेक्स करने में असमर्थ है, तो उसे नपुंसकता होने का निदान किया जाता है।

विभिन्न शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों प्रकार के कारणों से ही पुरुषों को कमजोर या अस्थिर लिंगोत्थान का सामना करना पड़ सकता है। लिंगोत्थान की अक्षमता के कारणों और तंत्रों का अब विस्तार से अध्ययन किया जा चुका है, और इस नाजुक समस्या का हल करने के लिए प्रभावी तरीकों को विकसित करना संभव हो गया है।

लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया कई कारकों के कारण हो सकता है। यह स्थिति अक्सर मौजूदा बीमारियों की जटिलता से पैदा होती है। ED या कमजोर लिंगोत्थान को पैदा करने वाले कारकों को कई समूहों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. अंतःस्रावी तंत्र की विफलता। कमजोर लिंगोत्थान के सामान्य कारणों में मधुमेह, अविकसित यौन ग्रंथियां, प्रोलैक्टिनोमा (प्रोलैक्टिनोमा पिट्यूटरी ग्रंथि का एक सौम्य गैर कैंसर कारक ट्यूमर है जो प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन का उत्पादन करता है।) और मोटापा शामिल हैं।
  2. मनोवैज्ञानिक प्रकृति की समस्याएं। अवसाद, शराब और नशीली दवाओं के दुरुपयोग, तनाव। अक्सर भावनात्मक समस्याओं के कारण ही आदमी लिंगोत्थान में पूरी तरह अक्षम हो जाता है।
  3. ह्रदय और रक्त वाहिकाओं के विकार। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर या श्रोणि अंगों में खून की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण लिंगोत्थान की गुणवत्ता बिगड़ सकती है।
  4. रीढ़ की हड्डी के रोग, पार्किंसंस रोग (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक अपकर्षक विकार, जिसमें शरीर में कंपकंपी होती है और मांसपेशियों के बीच का समन्वय बिगड़ जाता है), मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एक पुराना तेजी से फैलने वाला तंत्रिका विकार जिसमें कुछ तंत्रिका तंतुओं के आस-पास की माइलिन कोष क्षतिग्रस्त हो जाती है) और अन्य तंत्रिका संबंधी विकार।
  5. चोट, गंभीर सूजन, पेरोनी रोग के परिणामस्वरूप जननांगों में स्थूल परिवर्तन।

नाड़ी संबंधी विकार ही लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया का सबसे आम कारण है, इसके बाद मनोवैज्ञानिक कारकों और तंत्रिका तंत्र के रोगों के लक्षणों का स्थान है। अंतःस्त्रावी विकार लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया के सबसे विरल कारण हैं।

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लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया के लक्षण

लक्षणों के साथ-साथ उनके प्रकट होने की तीव्रता लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया के कारणों और उसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। लगभग एक तिहाई रोगियों में इसके शुरूआती लक्षण 18 से 35 वर्ष के बीच प्रकट होते हैं। सामान्य तौर पर इस उम्र में लिंगोत्थान संबंधी समस्या मनोवैज्ञानिक कारकों से पैदा होती है और कमजोर लिंगोत्थानों के रूप में प्रकट होती है। और साथ ही रात और सुबह में होनेवाला लिंगोत्थान नियमित रूप से होता रहता है।

इसके विपरीत, स्वास्थ्य समस्याएं ज़रूरत पड़ने पर होनेवाले और सहज में प्रकट होनेवाले लिंगोत्थानों में से दोनों को कमजोर करती हैं। नाड़ी, तंत्रिका और हार्मोन संबंधी विकारों के कारण होनेवाली यौन अक्षमता के मुख्य लक्षण कमजोर और विरल लिंगोत्थान हैं, जिसमें पुरुष के अन्दर पर्याप्त यौन उत्तेजना पैदा होने के बावजूद उसका लिंगोत्थान उतना मजबूत नहीं हो पाता है। यदि एक नाड़ी संबंधी विकार से पीड़ित यौनाचार के अनुभवी व्यक्ति का सेक्स के दौरान या उससे पूर्व समय से पहले का स्खलन हो जाता है, तो यह एक खतरनाक लक्षण है। कामेच्छा की कमी भी ध्यान देने योग्य लक्षणों में से एक है।

इस तथ्य के बावजूद कि जैविक प्रकृति के लक्षण बहुधा ज्यादा अनुभव में आते हैं, अध्ययनों से पता चला है कि लिंगोत्थान में असफलता का कारण अक्सर मनोवैज्ञानिक समस्याएं ही होती हैं। शारीरिक परिवर्तन, थकान, वृद्धावस्था, अत्यधिक या अपर्याप्त यौन गतिविधि के कारण होने वाली लिंगोत्थान की गड़बड़ी के प्राकृतिक रूप से निर्धारित या सांयोगिक मामलों को रोगात्मक स्थिति नहीं मानी जानी चाहिए। लिंगोत्थान की आवधिक (विरल) गड़बड़ी रोगात्मक नहीं है और पर्याप्त विश्राम लेकर और अपने यौन संबंध में सुधार करके इसे आसानी से दूर किया जा सकता है।

लिंगोत्थान की गड़बड़ी मिटाने के लिए उपयोग किए जाने वाले तरीके

अगर लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया बहुत अधिक बार होती है, तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से परामर्श कर लें। लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया के कारणों का निर्धारण करने और उपयुक्त उपचार पाने का यही एकमात्र तरीका है। कमजोर लिंगोत्थान के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दवाओं के उपचार, मनोवैज्ञानिक सुधार और ऑपरेशन सहित विभिन्न तरीकों का उपयोग करता है।

•दवा चिकित्सा (ड्रग थेरेपी)

ड्रग थेरेपी में आमतौर पर फॉस्फोडाइस्टेरस टाइप 5 इनहिबिटर का उपयोग शामिल होता है। ये पदार्थ लिंग में रक्त वाहिकाओं का विस्तार करके लिंगोत्थान संबंधी दुष्क्रिया को दूर करते हैं। उनका एक त्वरित उत्तेजक प्रभाव पड़ता है और इनका उपयोग आमतौर पर मनोवैज्ञानिक कारकों या नाड़ी संबंधी रोगों के कारण होने वाली लिंगोत्थान की अक्षमता के इलाज के लिए किया जाता है। यदि कमजोर यौन क्रिया हार्मोन संबंधी विकारों के कारण होती है, तो टेस्टोस्टेरोन के सामान्य स्तर को बहाल करने की आवश्यकता होती है।

ध्यान दें! प्राकृतिक आहार की खुराक को छोड़कर, कोई भी दवा एक व्यापक चिकित्सा परीक्षण के बाद किसे प्रतिष्ठित डॉक्टर द्वारा ही निर्धारित की जानी चाहिए। यदि आपके पास किसी डॉक्टर का पर्चा नहीं है, तो आपको केवल हैमर ऑफ़ थॉर जैसे पूर्णतः प्राकृतिक, हार्मोन मुक्त पूरक ही लेना चाहिए।

• इंट्राकैवर्नस इंजेक्शन

इंट्राकैवर्नस इंजेक्शन कम से कम दुष्प्रभावों वाला एक आधुनिक और अत्यधिक प्रभावी विधि है। इस उपचार में लिंग की नलिकाओं में प्रोस्टाग्लैंडिन ई 1 का इंजेक्शन दिया जाता है। यह विधि एक प्राकृतिक उत्तेजना पैदा करती है जो 80% रोगियों के यौन जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करती है। केवल इंजेक्शन के कारण होने वाला दर्द ही इसका एकमात्र नकारात्मक पहलू है।

• मनोचिकित्सा

मनोचिकित्सा का प्रयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब यौन गड़बड़ियों का कारण कोई मनोवैज्ञानिक समस्या हो। इस मामले में निम्नलिखित विधियां प्रभावी हैं:

1. सेक्स थेरेपी, जो मनोचिकित्सा का एक तरीका है।

2. यौन उत्तेजना संबंधी व्यावहारिक सिफारिशों का उपयोग करना।

3. एक स्वस्थ जीवनशैली ग्रहण करना।

4. सेक्स के दोनों भागीदारों के बीच मनोवैज्ञानिक बाधाओं को खत्म करना।

कमजोर लिंगोत्थानों के इस प्रकार के उपचार के लिए दोनों भागीदारों में आपसी सहयोग की आवश्यकता होती है।

• सर्जरी के तरीके

ऑपरेशन केवल लिंग के रक्त वाहिकाओं या ऊतकों में उन रोगजनक परिवर्तनों के मामले में मदद कर सकता है जो खून के स्वस्थ बहाव को बाधित करते हैं। ऑपरेशन की कुछ प्रक्रियाएं धमनियों और नाड़ी लुमेन को बढ़ाने में मदद करती हैं और बाद में खून के सामान्य बहाव को बहाल करती हैं। यदि आये हुए परिवर्तन को पूर्वावस्था में लाना असंभव हो और लिंग के ऊतकों को पूरी तरह से बहाल नहीं किया जा सकता हो, तो एक इंट्राकैवर्नस प्रोस्थेसिस का उपयोग किया जाता है। यह विधि सबसे उग्र है।

लिंगोत्थान संबंधी मुद्दों का आजकल आसानी से इलाज किया जा सकता है, खासकर यदि रोग का निदान इसके शुरुआती चरणों में ही कर ली जाय। यदि आपको खतरनाक लक्षणों का अनुभव होता है, तो समय पर इलाज प्राप्त करने के लिए तुरंत एक विशेषज्ञ से परामर्श लें। आपकी जांच करने वाले चिकित्सक न केवल रोग के कारण को उसके शुरूआती चरण में ही पहचान लेंगे बल्कि उसके लिए उपयुक्त उपचार भी देंगे।

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