लिंग का आदर्श साइज़

लिंग के साइज़ से पुरुष कम उम्र से ही परेशान हो सकते हैं। किशोरवस्था आने तक यह बड़ी चिंता का विषय बन सकता है। कई छोटी उम्र के लड़के इस बात से चिंतित रहते हैं कि उनका साइज़ छोटा रह गया है। लिंग के औसत और आदर्श साइज़ पर शोध किए गए हैं।

हाँ, नतीजे एक सौ प्रतिशत सटीक तो नहीं होते लेकिन ऐसे आंकड़ें मौजूद हैं जिनसे आप शुरुआत कर सकते हैं। इन आंकड़ों से आप दूसरों की तुलना में अपनी स्थिति का अंदाज़ लगा सकते हैं।

यह लेख इस विषय पर बात करता है कि कौन सा साइज़ आदर्श माना जाए, आप अपने लिंग के साइज़ को बड़ा कर सकते हैं या नहीं और क्या औरतों को चरम सुख की प्राप्ति साइज़ पर निर्भर होती है।

लिंग के सामान्य और औसत साइज़

लिंग का सटीक साइज़ उसके पूरी तरह से खड़ा होने पर मापा जाता है। लिंग को उसके आधार से मुंड तक मापा जाना चाहिए। सीधे खड़े हो जाएँ और सुनिश्चित कर लें कि आपका लिंग फर्श के समानान्तर है। शोधों में लिंग का साइज़ इसी तरह से मापा जाता है। नतीजों की तुलना करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक खास मैप विकसित किया है जिसमें माप दिए गए हैं।(पूरी तरह से खड़े और शिथिल लिंगों के लिए)।

सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा यह था कि शोधकर्ताओं को ऐसे पुरुषों को ढूँढने में परेशानी हो रही थी जो प्रयोग के दौरान पूरी तरह से खड़ा रख सकें। इसलिए उन्होने खास दवाओं की मदद से खड़ा किया जिससे माप की सटीकता कम हो गई।

पुरुषों द्वारा घर पर लिए गए माप प्रयोगशाला में लिए गए मापों से अलग थे। आम तौर पर खुद मापे गए साइज़ शोधकर्ताओं द्वारा मापे गए साइज़ों से बड़े थे। इसलिए खड़े होने की क्वालिटी के आधार पर थोड़े सुधार की गुंजाइश रहती है क्योंकि माहौल के आधार पर लिंग के खड़े होने का अवस्था में भी काफी बदलाव आ सकता है।

मापों के अनुसार लिंग की औसत लंबाई 13-14 सेमी पाई गई। आधे से ज़्यादा पुरुष इसी श्रेणी में आते थे।

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हालांकि शोधकर्ता लिंग के एक औसत साइज़ पर पहुँच जरूर पाए लेकिन लिंग का एक “सामान्य” साइज़ थोड़ी असपष्ट सी अवधारणा ही है। यह कहना तर्कसंगत होगा कि एक सामान्य लिंग साइज़ वह होता है जिससे आप संतोषप्रद सेक्स जीवन पा सकें और औरतों को संतुष्ट कर पाएँ।

अमेरिका में कई वर्षों पहले किए गए एक शोध में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया था: 90% से अधिक महिलाओं ने बताया था कि वे अपने पार्टनर के लिंग के साइज़ से पूरी तरह खुश थीं और उन्हें यह समझ नहीं आता था कि मर्द इस मुद्दे को लेकर इतने चिंतित क्यों रहते हैं।

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लिंग का आदर्श साइज़

महिलाएँ चाहे जो कहें, अधिकतर पुरुष यह नहीं मानते कि साइज़ से फर्क नहीं पड़ता। ऐसा लगता है कि मर्दों के मन में एक आदर्श साइज़ की छवि बैठ गई है। एक आदर्श लिंग वह होता है जो औरत की योनि का एक बेहतरीन संपूरक हो। ऐसा लिंग दिखने में कैसा होना चाहिए? इस समस्या को मानव शरीर की बनावट पर एक नज़र डाल कर आसानी से हल किया जा सकता है।

एक औरत की योनि की औसत लंबाई 8 सेमी होती है। जब औरत कामुक रूप से उत्तेजित होती है तो यह लंबाई 2/3 बढ़ जाती है। इसका अर्थ यह होता है कि 10 सेमी से लंबा लिंग औरत के कामुक सुख के लिए पर्याप्त होगा। लेकिन कई लोग ऐसा मानते हैं कि औरत को चरम सुख केवल बड़े लिंग से ही मिल सकता है और 12-14 सेमी भी पर्याप्त नहीं होता। यह सच नहीं है। कुछ आंकड़ें यह इंगित करते हैं कि लिंग का आदर्श साइज़ 11.5 सेमी है।

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लिंग की मोटाई का मानक साइज़ है 3-4.5 सेमी। प्रसंगवश, महिलाओं के लिए लंबाई की तुलना में यह ज़्यादा मायने रखता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने लिंग के साइज़ को ज़्यादा गंभीरता से न लें। ध्यान रखें कि हर व्यक्ति के शरीर की बनावट थोड़ी अलग होती है। इसको लेकर असुरक्षित महसूस करने से कोई फायदा नहीं होता।

13 और 14 की उम्र में साइज़

पुरुष का लिंग जन्म से लेकर किशोरावस्था तक लगातार नहीं बढ़ता रहता है। 13 साल की उम्र तक लिंग के साइज़ में बड़े अंतर नज़र आने लगते हैं। औसतन (किशोरावस्था तक), लिंग का साइज़ लगभग 6-7 सेमी होता है क्योंकि छोटे लड़कों में पुरुष हॉरमोन कम होते हैं। लड़कों में किशोरावस्था अधिकतर द्वीतीय सेक्स गुणों से पहचानी जाती है। 12-14 की उम्र से उनकी आवाज़ भारी होने लगती है और काँख तथा लिंग के पास बाल आने लगते हैं। इस उम्र से गीले सपने आने शुरू हो जाते हैं और लड़के लड़कियों में दिलचस्पी लेने लगते हैं। करीब 17 की उम्र में लिंग बढ़ना बंद हो जाता है और साथ ही किशोरवस्था भी खत्म होने लगती है।

मेडिकल जाँचों के दौरान डॉक्टर किशोरावस्था के संकेतों पर ध्यान देते हैं लेकिन लिंग के साइज़ की जाँच नहीं करते। लेकिन, द्वीतीय सेक्स गुणों का विकास होना बहुत जरूरी होता है। यदि 13-14 की उम्र के बीच में बदलाव होना शुरू नहीं होते तो यह हॉरमोन असंतुलन की निशानी होता है और इसका खास इलाज आवश्यक होता है।

लिंग का साइज़ बड़ा करने के उपपाय

लड़कों में किशोरावस्था से ही लिंग लंबा करने की इच्छा उभर सकती है। इसी उम्र में लड़के एक दूसरे से अपनी तुलना करना करते हैं। समय के साथ कई लड़कों को इसका जुनून सवार हो जाता है जिससे छुटकारा आसान नहीं होता। यदि आपको वाकई में अपना लिंग बड़ा करना है तो सुरक्षित और पहुँच के अंदर की तकनीकों का उपयोग करें जैसे:

  • वैक्यूम पंप का इस्तेमाल। यह एक असरदार तकनीक है जिससे अस्थायी नतीजे मिल जाते हैं। पंप को सेक्स के पहले इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग लिंग को बड़ा करके स्तंभन को और सख्त करने के लिए किया जाता है। पंप खरीदने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • लिगामेंटोंटॉमी। यह प्लास्टिक सर्जन्स द्वारा किया गया एक ऑपरेशन होता है। इसका एक पहलू यह भी है कि आप इससे मोटाई नहीं बढ़ा सकते। ऐसा करना तभी सभव होता है जब आप कोई उत्तक ट्रांसप्लांट करवाएँ।
  • लिंग लंबा करने की दवाएँ। यह एक तरह से हॉरमोन के धीमे काम करने वाले बम लेने जैसा है। इनसे लिंग का साइज़ तो नहीं बदलता लेकिन इनके नतीजे आम तौर पर बेहतर होते हैं और खड़ापन देर तक चलता है। अपने डॉक्टर से सलाह लिए बिना इन दवाओं को लेना जोखिम भरा होता है।
  • जेल्क़िंग। एक खास मालिश की तकनीक जिससे इरेक्टाइल उत्तकों को खींचा जाता है। इसे खास लिंग बड़ा करने की क्रीमों की मदद से किया जा सकता है।

कुछ दवा उत्पादक कंपनियाँ ऐसी क्रीमें बनाती हैं जिनसे लिंग का साइज़ बढ़ जाता है लेकिन ये केवल तभी असर करती हैं जब इन्हें खास मालिश तकनीकों या एक्सटेंडर के साथ उपयोग किया जाए।

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यह बताना आवश्यक है कि लिंग के साइज़ की समस्या अधितकर मनोवैज्ञानिक होती है, बिल्कुल वैसी ही जैसी कई लड़कियों में अत्यधिक दुबले होने की चाह। हाँ, लेकिन यदि कोई पुरुष पूरी तरह से सुनिश्चित है कि उसे बड़ा लिंग चाहिए है तो वह डॉक्टर से सलाह लेकर लिंग का साइज़ बढ़ाने के लिए कदम उठा सकता है।
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