क्या इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन-दोष) संभावी हृदय रोगों का संकेत है?

कई लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन (खड़े होने में समस्याएँ या स्तंभन-दोष) को एक अलग घटना के रूप में देखते हैं। सच यह है कि बार-बार स्तंभन दोष होना किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। कोई ऐसी समस्या, जो खतरनाक और जानलेवा भी हो सकती है। यह समस्या है हृदय रोग।

स्तंभन-दोष के कारण

स्तंभन-दोष को हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं मानना चाहिए। स्तंभन पाने और उसे बनाए रखने में आ रही दिक्कतों के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

कुछ आम कारण हैं (इन कारणों के बारे में और जानकारी यहाँ है):

  •  हाई-कॉलेस्ट्रोल या उच्च रक्त-चाप
  •  मधुमेह
  •  मोटापा
  •  मल्टीपल स्केलेरोसिस
  •  पार्किंन्संस डीजीज़
  •  कुछ दवाओं के साइड-इफेक्ट
  •  ज़्यादा शराब पीना
  •  सिग्रेट पीना
  •  प्रोस्टेट संबंधी मुद्दे और ऑपरेशन
  •  डिप्रेशन और एन्ज़ायटी
  •  तनाव और थकान
  •  रिश्तों में समस्याएँ और सेक्स मुद्दों को लेकर बात-चीत में कमी

जैसा आप समझ सकते हैं, इनमें से कुछ समस्याएँ हृदय के कार्य-कलाप से संबन्धित हैं, वहीं कुछ समस्याएँ दूसरी बीमारियों के कारण उभरती हैं और कुछ पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक हैं।

जब आप स्तंभन-दोष के लिए किसी मूत्र-रोग विशेषज्ञ से मिलेंगे तो आम तौर पर आपके कुछ मेडिकल टेस्ट कराए जाएंगे। इन टेस्ट का उद्देश्य यह जानना होता है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन खुद में एक समस्या है या दूसरी बीमारियों के कारण हो रही है।

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स्तंभन दोष हृदय रोग के संकेत के रूप में

स्तंभन और हृदय प्रणाली के कार्यकलापों में घनिष्ठ संबंध होता है। स्तंभन प्राप्त करने के लिए लिंग के ऊतकों में पर्याप्त मात्रा में रक्त का प्रवेश करना जरूरी होता है। जब हृदय पर्याप्त शक्ति से रक्त पंप करता है और धमनियों में किसी तरह की चर्बी जमा (एथेरोस्क्लेरोसिस नामक परिस्थिति) नहीं होती तो लिंग अच्छे से स्तंभित होता है।

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शोधकर्ता मानते हैं कि यदि स्तंभन-दोष हृदय-रोगों से पहले परिलक्षित होता है तो यह रक्त धमनियों की परतों की लाइनिंग में समस्या का संकेत होता है।

रक्त धमनियों की लाइनिंग को एंडोथीलियम कहते हैं। एंडोथीलियल के कार्यकलाप में गड़बड़ी से हृदय में पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुँच पाता। इसके कारण एथेरोस्क्लेरोसिस उत्पन्न होने की परिस्थितियाँ बन जाती हैं। इन सभी के संयुक्त प्रभाव से हृदय रोग जनित हो सकते हैं। जाहिर है, स्तंभन-दोष हमेशा ही हृदय रोग की निशानी नहीं होता लेकिन डॉक्टर सलाह देते हैं कि स्तंभन-दोष से ग्रस्त लोगों को हृदय रोगों के लिए अपनी जाँचें करवा लेनी चाहिए। इस प्रकार की जांच पहले ही करवा लेने से गंभीर बीमारियों का जोखिम कम हो जाता है।

जोखिम

जैसा पहले बताया गया है, स्तंभन-दोष हमेशा हृदय या धमनियों की समस्याओं के संकेत नहीं होते। हाँ, स्तंभन-दोष और हृदय रोगों में कई ऐसे जोखिम हैं जो एक जैसे होते हैं। यदि इनमें से कोई भी उपस्थित हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।

स्तंभन-दोष होने और हृदय रोग समस्याओं में सबसे आम कारक हैं, मोटापा, ज़्यादा शराब पीना, धूम्रपान, उच्च-रक्तचाप, कॉलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ा होना, उम्र (युवा पुरुषों में स्तंभन-दोष अधिकतर किसी बीमारी के कारण होता है) और टेस्टोस्टेरोन स्तर में कमी

यदि आपको भी इनमें से कोई जोखिम कारक हों तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार हृदय रोग की जाँच करवा लेना चाहिए।

यदि हृदय रोग और स्तंभन-दोष में कोई संबंध पाया जाता है तो आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव करने को कहा जाएगा जैसे स्वस्थ खान-पान, वजन कम करना, एक्सर्साइज़ करना और धूम्रपान का त्याग। इन बदलावों से दोनों रोगों पर बहुत असर पड़ सकता है।

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शोध और समर्थक प्रमाण

कई क्लीनिकल शोधों ने स्तंभन-दोष और हृदय रोग के बीच संबंध के बारे में जानने की कोशिश की गई है। एक ऑस्ट्रेलियन शोध इसमें सबसे ज़्यादा तथ्य उजागर करता है।

शोधकर्ताओं ने 45 वर्ष या अधिक उम्र के पुरुष वालांटियर्स के साथ काम किया। इनमें से किसी भी पुरुष को हृदय रोग की पहले कोई शिकायत नहीं रही थी।

प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों को मध्यम से लेकर गहन स्तंभन-दोष था, उनकी दूसरे वालांटियर्स की तुलना में हृदय रोग के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 50 प्रतिशत अधिक थी।

कई मामलों में स्तंभन-दोष आपको संभावित हृदय रोगों की पूर्व-चेतावनी देते हैं। इसे यह सोचकर नज़रअंदाज़ न करें कि यह तो सिर्फ सेक्स संबंधी विषय है।

अधिकतर, स्तंभन-दोष के पीछे हृदय रोग होता है। इस मुद्दे के बारे में किसी डॉक्टर से सलाह लें। हो सकता है इससे आपकी ज़िंदगी बच जाए!

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