इरेक्टाइल डिसफंक्शन। लक्षण और इलाज

जब कोई पुरुष लिंग खड़ा करने और उसे खड़ा रखने में असमर्थ होता है तो इसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहते हैं। आम तौर पर यह अस्थायी समस्या होती है लेकिन ऐसे दीर्घकालिक मामले भी होते हैं जिससे कई पुरुष क्वालिटी सेक्स जीवन नहीं जी पाते।

परिचय

अधिकतर पुरुषों को अपने जीवन में कभी-न-कभी इस समस्या का सामना करना पड़ता है। कई लोगों ने महसूस किया होगा कि उनका लिंग अचानक खड़ा होना बंद हो जाता है या जरूरत के समय खड़ा नहीं हो पाता। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती। ये कोई अच्छी चीज नहीं है लेकिन ऐसा होता है। सबसे पहले समस्या के प्रकार के बारे में जानने की जरूरत होती है, और इसके बाद ही इसे ठीक करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन 2 प्रकार का होता है:

  1. साइकोजेनिक (मनोवैज्ञानिक कारणों से)
  2. ऑर्गैनिक (शारीरिक कारणों से)

मनोवैज्ञानिक कारणों से उत्पन्न होने वाली सेक्स समस्याएँ के पीछे बाहरी कारण या भावनात्मक अनुभव होते हैं। स्तंभन न हो पाने के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  •  स्थिति ठीक न होना;
  •  तनाव;
  •  भावनात्मक तनाव;
  •  डर।

आम तौर पर साइकोजेनिक इरेक्टाइल डिसफंक्शन युवा लड़कों में बहुत आम होता है। इसके इलाज के लिए संभोग में बाधा बन रही समस्याओं को हल किया जाता है। यदि किसी का इरेक्टाइल डिसफंक्शन साइकोजेनिक है तो इसके लिए किसी दवाई की जरूरत नहीं होती।

ऑर्गैनिक इरेक्टइल डिसफंक्शन के पीछे बीमारियाँ या स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ सेक्स की गुणवत्ता में कमी आना स्वाभाविक होता है लेकिन जरूरी नहीं है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन उम्र बढ़ने के कारण ही हो रहा हो। इसके पीछे शारीरिक बीमारियाँ और विकार भी हो सकते हैं।

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स्तंभन की गुणवत्ता पर प्रभाव डालने वाले कारक:

  • बुरी आदतें (धूम्रपान, शराब, एक्सर्साइज़ की कमी);
  • हृदय और रक्त धमनियों की बीमारियाँ;
  • किडनी और लीवर के विकार;
  • मधुमेह संबन्धित जटिलताएँ;
  • नर्व में नुक्सान;
  • कुछ दवाइयाँ;
  • हॉरमोनल विकार

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हॉर्मोनल असंतुलन और नामर्दी

हॉर्मोनल स्तर मानव सेक्स कार्यकलाप में बड़ा रोल अदा करते हैं।

यदि हम सेक्स जीवन की बात करें तो टेस्टोस्टेरोन बेहद आवश्यक होता है। इस हॉरमोन से ही निर्धारित होता है कि आदमी का स्टैमिना, शारीरिक बल, कामेच्छा और यहाँ तक कि लिंग का साइज़ कितना होगा।

टेस्टोस्टेरोन की कमी से इरेक्टइल डिसफंक्शन हो जाता है और सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है।

इसलिए स्तंभन न हो पाने (या नामर्दी) के पीछे टेस्टोस्टेरोन की कमी भी हो सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन कम होता चला जाता है। तनाव या प्रदूषण के कारण भी ऐसा हो सकता है।

एंड्रोजन का आदर्श स्तर मेनटेन करने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम, बुरी आदतें छोड़ना और प्रोटीन बहुल भोजन लेने की सलाह दी जाती है।

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जैविक रूप से सक्रिय प्राकृतिक कुछ खाने की चीजों, जैसे Hammer of Thor से भी टेस्टोस्टेरोन उत्पादन सामान्य किया जा सकता है।

फूड सप्लिमेंट्स सिंथेटिक हॉरमोनल एनालॉग से अलग होते हैं। हॉर्मोनल दवाएँ लिखने के पहले डॉक्टर कई तरह के हॉरमोन संबंधी टेस्ट करवाते हैं, वहीं न्यूट्रिशनल सप्लिमेंट्स लेने के लिए किसी मेडिकल टेस्ट की जरूरत नहीं होती, बस इसके निर्देशों के अनुसार लेना होता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन। इलाज और रोकथाम

आधुनिक चिकित्सा में इस संवेदनशील समस्या के इलाज के कई तरीके उपलब्ध हैं। मनोवैज्ञानिक समस्याओं वाले मरीजों को प्रोफेशनल सलाह से फायदा हो सकता है। ऑर्गैनिक प्रकार की समस्याओं के लिए ऑपरेशन या खास फॉर्मूला से इलाज जरूरी होता है।

अधिकतर लोग इलाज के पूरा होने के पहले ही स्थिर स्तंभन पाने के इच्छुक रहते हैं। सौभाग्य से इस समस्या को आसानी से सुलझाया जा सकता है। आधुनिक पुरुष लिंग के लिए Sildenafil और वैक्यूम पंप उपयोग करते हैं जिन्हें इलाज के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

हमेशा ध्यान रखें कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या का हल है, और इसे ठीक करने के कई तरीके होते हैं। लेकिन समस्या को नज़रअंदाज़ न करें और ठीक हो जाएँ।

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